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About Rajasthani Sanskritic Mandal

राजस्थानी सांस्कृतिक मण्डल का संक्षिप्त इतिहास एक नजर में... लगभग सौ से भी अधिक वर्षों पूर्व राजस्थानी समाज के लोग अपने व्यापार के सिलसिले मे आन्ध्रप्रदेश के इस तटीय शहर विशाखापट्टनम में आकर बसने लगे थे। अपनी मेहनत व लगन की वजह से वे यहां अपने व्यापार धन्धे का विकास करने लगे। धीरे-धीरे राजस्थानी समाज के परिवारों की संख्या बढ़ने लगी। समय गुजरता गया, राजस्थानी समाज व उनका व्यापार बढ़ता गया। विशाखापट्टनम शहर भी तीव्र गति के साथ बढ़ रहा था। यह नगर अब एक शहर का रूप लेने लगा था। गुजरते वक्‍त के साथ राजस्थानी समाज के बन्धुओं ने महसूस किया कि उनका “सशक्त संगठन” बने। एक ऐसी संस्था की नींव रखी जाये जिसमें दीवाली-होली व अन्य त्यौहार एक छत के नीचे एकत्र होकर सामूहिक रूप से मनाये जाये। समय-समय पर राजस्थानी संस्कृति के अनुरूप सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायें। इन्हीं सभी सोच के साथ दिनांक 21-3-1965 रविवार को श्री नन्‍दकिशोरजी नांगलिया के निवास पर रथानीय राजस्थानी समाज की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में आपसी विचार विमर्श के पश्चात् यह सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि अपनी एक संस्था का गठन किया जाये।


Founder Members of Rajasthani Sanskritic Mandal :

Founder Members :
S.No Name
1. Sri Inder Sen Mittal
2. Smt. Lakshmi Devi Mittal
3. Sri Nand Kishore Nangalia
4. Smt. Deyavati Nangalia
5. Sri Gopal Das Khaitan
6. Smt. Pushpa Devi Khaitan
7. Sri Ram Kishan Saraf
8. Smt. Pramila Saraf
9. Sri Prakash Chand Golecha
10. Smt. Taradevi Golecha
11. Sri Prayag Das Rathi
12. Smt. Sharada Devi Rathi
13. Sri Mohan Lal Mittal
14. Sri Raj Kumar Bajaj
15. Sri Changan Lal Ghiya
16. Sri Ghewar Chand Hirawat
17. Sri Chagan Lal Mittal
18. Sri Mangtu Ram Sharma
19. Sri Gopal Chand Sarawagi
20. Sri Rattan Lal Dani
21. Sri Vidhyadhar Jhunjhunwala
22. Sri Hiralal Tatiya (Jain)
23. Sri Hanuman Prasad Khemka
24. Smt. Shanta Devi Khemka
25. Sri Harish Chandra Gupta